मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ की अनदेखी पर उठे सवाल, संगठन में वर्षों की सेवा के बावजूद नहीं मिली जिम्मेदारी…….. 

मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ की अनदेखी पर उठे सवाल, संगठन में वर्षों की सेवा के बावजूद नहीं मिली जिम्मेदारी……..

बस्ती। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ जनपद बस्ती में पार्टी के समर्पित, कर्मठ और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते हैं। लंबे समय से संगठन के प्रति निष्ठा, समर्पण और अनुशासन के साथ कार्य करते हुए उन्होंने पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन द्वारा सौंपे गए प्रत्येक दायित्व का उन्होंने पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया, लेकिन वर्षों की सक्रिय सेवा के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान और अवसर न मिलना अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ का सार्वजनिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वर्ष 2002 से 2006 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और महाविद्यालय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। इसी दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आकर उन्होंने विचार परिवार को मजबूत करने का कार्य किया। शाखाओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

वर्ष 2010 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में अपनी औपचारिक राजनीतिक यात्रा शुरू की और 2012 से पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में निरंतर कार्यरत हैं। सदस्यता अभियान, जनसंपर्क अभियान, बूथ सशक्तिकरण कार्यक्रम तथा संगठन विस्तार जैसे कार्यों में उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पार्टी की नीतियों और सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में भी वे लगातार जुटे रहे।

इसके अलावा पार्टी के विभिन्न आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और जनहित अभियानों में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई। वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव, 2014 लोकसभा चुनाव, 2017 विधानसभा चुनाव, 2019 लोकसभा चुनाव, 2022 विधानसभा चुनाव तथा 2024 लोकसभा चुनाव सहित कई महत्वपूर्ण चुनावों में पार्टी द्वारा दिए गए दायित्वों का उन्होंने निष्ठापूर्वक निर्वहन किया। कई अभियानों में उन्हें प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया।

संगठन में उनकी कार्यशैली और समर्पण को देखते हुए वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा नगर उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2016 में नगर महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। बाद में उन्हें विधि विषय विभाग का जिला संयोजक भी नियुक्त किया गया। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं के समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

राजनीतिक क्षेत्र के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ की मजबूत पहचान है। वे कायस्थ समाज से आते हैं और समाज के संगठन एवं सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयासरत हैं। बस्ती समेत प्रदेश के कई जिलों में उन्होंने समाज को संगठित करने का कार्य किया। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भी उन्होंने कई जिलों में संगठन खड़ा कर समाज को जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है।

स्थानीय राजनीति में मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ को भाजपा संगठन की रीढ़ माना जाता है। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ है और समाज के विभिन्न वर्गों में उनकी मजबूत पहचान है। इसके बावजूद पार्टी में उन्हें अपेक्षित स्थान न मिलना कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच सवाल खड़े कर रहा है।

वर्ष 2023 में नगर पालिका परिषद बस्ती अध्यक्ष पद के लिए उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा था। कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी उनके समर्पण और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें टिकट देगी, लेकिन पार्टी ने किसी अन्य प्रत्याशी को उम्मीदवार बना दिया। इसके बाद समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टिकट वितरण के इस फैसले का असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ा और पार्टी प्रत्याशी को जनता ने नकार दिया।

अब हाल ही में भाजपा जिला कमेटी के गठन में भी मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ को कोई स्थान न मिलने से चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कायस्थ बिरादरी के एक बड़े चेहरे और वर्षों से पार्टी को मजबूत करने वाले नेता की लगातार अनदेखी को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष बताया जा रहा है।

जनपद की राजनीति में अब यह सवाल उठ रहा है कि वर्षों से संगठन के लिए समर्पित मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ जैसे नेता को आखिर भाजपा में उचित स्थान कब मिलेगा। समर्थकों का मानना है कि यदि ऐसे जमीनी और समर्पित नेताओं को सम्मान नहीं मिला, तो इसका असर संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।

रिर्पोटर :-इन्द्र भूषण चौबे

निष्पक्ष मीडिया