ऑपरेशन के लिए कम पड़ रही मशीन, करना पड़ रहा है इंतजार
रोजाना ओपीडी में आते हैं हड्डी से संबंधित 150 से अधिक रोगी
– ऑपरेशन के लिए कम पड़ रही मशीन, करना पड़ रहा है इंतजार
बस्ती। जिला अस्पताल में लगातार हड्डी रोग विभाग में ओपीडी का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन औसतन 100 से 150 मरीज इलाज के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। लेकिन एक ही पुरानी सी-आर्म मशीन होने से ऑपरेशन करने में परेशानी हो रही है।
मंडल मुख्यालय होने से जिला अस्पताल में तीनों जनपदों के मरीज आते हैं। हड्डी रोग विभाग में मरीजों की कतार लगी रहती है। अधिकांश में घुटने, हड्डी टूटने समेत आदि की शिकायत होती है और चिकित्सक ऑपरेशन के लिए सलाह देते हैं। लेकिन, यहां सिर्फ एक सी-आर्म मशीन लगी है। वह भी काफी पुरानी हो चुकी है। इससे ऑपरेशन में समय के साथ परेशानी भी हो रही है। एक ही मशीन पर पूरा लोड है। दूसरी मशीन नहीं होने से चिकित्सक भी बड़े ऑपरेशन करने में परेशान हो जा रहे हैं। वहीं तमाम लोग इस संकट के चलते निजी अस्पतालों में जाकर ऑपरेशन के लिए मजबूर होना पड़ता है।
चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल में हड्डी रोग विभाग में रोजाना 100 से अधिक लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ऑपरेशन वाले मरीज को ओटी में भेजा जाता है। यहां एकल सी-आर्म मशीन के चलते परेशानी है। मशीन के अभाव में चिकित्सक भी गंभीर हालात में आने वाले अधिकांश लोगों को रेफर करने को मजबूर हैं। बताया गया कि करीब पांच माह पूर्व ओटी के लिए एक और सी-आर्म मशीन के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अभी तक मशीन नहीं मिली।
इन मरीजों का होता है ऑपरेशन
अस्पताल में वर्तमान समय में प्रतिदिन 100 से अधिक ओपीडी हो रही हैं। इनमें से हड्डी रोग संबंधित गर्दन दर्द, कमर दर्द, घुटना दर्द, कंधा दर्द, दुर्घटनाओं में हड्डी टूटने के अधिक मामले आ रहे हैं। इनका ऑपरेशन पुरानी ओटी में पुरानी सी-आर्म मशीन पर किया जा रहा है।
एक बार टूट चुकी है सी-आर्म मशीन
जिला अस्पताल में ओटी में हुई चोरी के दौरान चोरों ने सी-आर्म मशीन तोड़ दी थी। इसके बाद उसे कई माह तक वैसे ही छोड़ दिया गया था। इससे ऑपरेशन ठप था। बाद में उसे दुरुस्त कराया गया था। अब उसी मशीन पर कार्य है। सर्जन के अनुसार छोटी एक्स-रे मशीन की तरह ही सी-आर्म काम करती है। इस मशीन की सहायता से चिकित्सक ऑपरेशन करते समय अंगों के थ्री-डी चित्र देख सकते हैं और टूटी हड्डी को जोड़ते समय प्लेट, राॅड लगाने की सही स्थिति का पता लगाते हैं। मशीन से यह पता लग जाता है कि स्क्रू, रॉड कहा लगाना है। इसकी मदद से चिकित्सक आसानी से गंभीर स्थिति में टूटी हड्डियों को सही प्रकार से जोड़ सकते हैं। मशीन की संख्या एक होने से ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
अस्पताल में आने वाले रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऑपरेशन, सर्जरी व प्लास्टर किए जा रहे हैं। एक और सी-आर्म मशीन के लिए प्रस्ताव पूर्व में भेजा जा चुका है। मशीन मिलने पर उसे ट्राॅमा सेंटर में स्थापित करेंगे, ताकि इमरजेंसी के मरीजों को त्वरित उपचार की सुविधा मिल सके। अभी ओटी में एक ही मशीन से ऑपरेशन हो रहा है।
– डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।









