बस्ती आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट के नाम पर मची है लूट 

आरटीओ ने आरोपों को बताया निराधार

रितेश चौधरी किस आदेश से ले रहे हैं ड्राइविंग टेस्ट, परिवहन विभाग से अधिकार पत्र सार्वजनिक करने की मांग

स्थानीय प्रभाव की आड़ में भ्रष्टाचारियों पर प्रशासन की चुप्पी

रितेश चौधरी को लेकर उठे सवाल, शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से व्यवस्था पर सवाल

बस्ती – डीटीआई कटरा बस्ती में ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट में पास कराने के नाम पर एक आवेदक से अतिरिक्त ₹2,000 मांगने का आरोप सामने आया है। आवेदक का कहना है कि उसने निर्धारित ₹1,000 राजस्व शुल्क जमा कर टेस्ट दिया था। अतिरिक्त रकम देने से इनकार करने पर लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया रोक दी गई। आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है, लेकिन शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

प्राप्त समाचार के अनुसार – #आवेदक ने रितेश चौधरी के निजी व्यक्ति होने का दावा करते हुए सवाल उठाया है कि उन्हें डीटीआई में ड्राइविंग टेस्ट लेने का अधिकार किस आधार पर दिया गया है। मामले में मारुति कंपनी के निजी कर्मचारी बताए जा रहे रितेश चौधरी का नाम सामने आया है। हालांकि, मामले की जांच कर यह स्पष्ट किए जाने की मांग की गई है कि डीटीआई कटरा में ड्राइविंग टेस्ट लेने के लिए कौन अधिकृत है और अतिरिक्त ₹2,000 किस मद में मांगे गए थे ? शिकायत के बाद निजी कर्मचारी की डीटीआई में भूमिका, वहां मौजूदगी और आवेदकों से संपर्क की अनुमति समेत टेस्ट प्रक्रिया की निगरानी की भी जांच जरूरी है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्धारित राजस्व शुल्क के बाद अतिरिक्त रकम मांगने की स्थिति कैसे बनी ? ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया सरकारी राजस्व और सड़क सुरक्षा से जुड़ी है, ऐसे में शिकायत की निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है क्योंकि यही गैर दक्षता प्राप्त ड्राइवर कल दूसरों की जान का खतरा बनेंगे । मुख्य सवाल यह है कि जब व्यवस्था सेंसर आधारित और ऑनलाइन टेस्ट की है तो सेंसर खराब होने की स्थिति में मैनुअल टेस्ट की अनुमति किसके आदेश से चल रही है साथ ही पूरे मामले में प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।